उत्तराखण्ड़ और हिमाचल की त्रासदी को राष्ट्रीय आपदा धोषित किया जाए-अखिलेन्द्र
लखनऊ 21 जून 2013, आल इण्डि़या पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) उत्तराखण्ड़ और हिमाचल के निवासियों और यात्रियों पर आई आपदा पर गहरा शोक और दुःख की इस धड़ी में उनके प्रति हार्दिक संवेदना प्रकट करता है। आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने आज जारी अपने बयान में कहा कि प्रकृति के आक्रोश की यह त्रासदी दिल दहला देने वाली है। यह त्रासदी कारपोरेट विकास की नीति का ही परिणाम है। पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचाने वाली इस नीति से वहां रहने वाले गरीब और असहाय लोग इस प्रकार की त्रासदी का शिकार हो रहे है। भूमफिया, बिल्ड़रों, कारपोरेट, ठेकेदारों और राजनेताओं व नौकरशाहों के गठजोड़ द्वारा लगातार अपने हितों की पूर्ति के लिए बांध बनाकर नदी के रूख मोड़े जा रहे है और बिना किसी सुरक्षा मानकों की चितां किए हुए होटल और आरामगृहों का निर्माण किया जा रहा है। इसने पर्यावरण सुरक्षा की चितां किए बिना अमीरों के पर्यटन और तीर्थयात्रियों की संख्या को बेहद बढ़ा दिया है। ऐसी त्रासदी को रोकने की तैयारी में कमी के सम्बंध में दो माह पूर्व ही सीएजी ने अपनी रिर्पोट में चेतावनी दी थी पर आपराधिक लापरवाही करते हुए उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी। इतना ही नहीें दिसम्बर 2007 के बाद आज तक राज्य दैवी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक तक नहीं की गयी।
उन्होनें ने मांग की है कि इस त्रासदी की व्याप्कता को देखते हुए इसे राष्ट्रीय आपदा धोषित किया जाए और इस आपदा में अभी भी फंसे हुए हजारों देशवासियों के जीवन की रक्षा और उनके पुर्नवास के लिए सभी संसाधनों का उपयोग किया जाए। उन्होनें इस त्ऱासदी की जिम्मेदारी तय करने और इसके लिए दोषियों को भी दण्डि़त करने की मांग की। उन्होनें जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सम्मान किया जाना चाहिए और बिना पर्यावरण अनुमति के एक भी निर्माण व खनन नहीं होना चाहिए।
This blog has been devised to represent the activities of All India Peoples Front(R), a political party aiming at forging a political alternative comprising of progressive, secular and radical parties.
Friday, 21 June 2013
Thursday, 20 June 2013
सपा सरकार कर रही विभाजन की राजनीति - अखिलेन्द्र
सपा सरकार कर रही विभाजन की राजनीति - अखिलेन्द्र
उपवास के बाद अखिलेन्द्र ने की बैठक
सहयोगी दलों के साथ मिलकर जन अधिकार अभियान करेगें तेज
लखनऊ 20 जून 2013, प्रदेश में अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर कानून के राज की स्थापना के लिए जन अधिकार अभियान को और तेज किया जाना चाहिए। यह बातें आज दस दिवसीय उपवास के बाद कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक का0 अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कही। उन्होनें कहा कि सपा सुप्रीमों के निर्देशन में चल रही अखिलेश की सरकार द्वारा पहले से ही विभाजन और अलगाव के दौर से गुजर रही प्रदेश की जनता को और भी विभाजित करने की राजनीति के विरोध में यह दस दिन का उपवास रहा है। अखिलेश सरकार ने सबसे पहले पूरे समाज से दलितों को अलगाव में डाल दिया और उनकी इस कार्यवाही को दलितों में ध्रुवीकरण के लिए मायावती ने भी मदद पहुंचाने का काम किया। सभी लोग जानते है कि आरक्षण के संदर्भ में नागराज के मुकदमें में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला था वह पिछड़ी जातियों के पिछड़ेपन के संदर्भ में था जिसकी चपेट में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग भी आ गए, इसे मात्र सुप्रीम कोर्ट में एक पुर्नविचार याचिका दायर कर ठीक कराया जा सकता था पर मायावती ने यह काम भी नहीं किया। परशुराम जयंती पर अभियान चलाने वाली सपा सरकार ने यह जानते हुए भी अति पिछड़ी जातियों को दलितों में संवैधानिक रूप से शामिल नहीं किया जा सकता क्योकि वह अछूत नहीं है, 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पास कर केन्द्र सरकार को भेजा है। यह और कुछ नहीं अति पिछड़ी जातियों को उनके सामाजिक न्याय के अधिकार से वंचित करने की कोशिश है। उन्होनें कहा कि मुलायम सिंह समाजवादी आंदोलन की पैदावार है और राजनीति की ईमानदारी का तकाजा है कि उन्हें कर्पूरी ठाकुर फार्मूला के आधार पर अति पिछड़ों का आरक्षण कोटा अन्य पिछड़ा वर्ग से अलग कर देना चाहिए।
उन्होनें कहा कि सपा सरकार प्रदेश में हिन्दू और मुस्लिमों के बीच की खाई को और बढ़ाने की राजनीति कर रही है। यह जानते हुए भी कि आतंकवाद के मुकदमें में फंसे लोगों का मुकदमा संवैधानिक रूप से सरकार वापस नहीं ले सकती महज मुसलमानों को शिकार बनाने के लिए इस सरकार ने मुकदमा वापसी की बड़ी-बड़ी धोषणाएं की। इससे हिन्दुओं को लगा कि महज वोट के लिए यह सरकार अपराधियों पर से मुकदमा वापस लेने का काम कर रही है और इससे मुसलमानों का भी भला नहीं हुआ। यदि सरकार अपनी धोषणा के प्रति ईमानदार होती तो वह इस सम्बंध में बनी जस्टिस आर.डी. निमेष कमीशन की रिर्पोट को एक्शन टेकन रिर्पोट के साथ विधानसभा में रखने में इतना विलम्ब न करती। अभी भी इस सरकार ने खालिद के बड़े पिता की तरफ से उसकी मौत और गिरफ्तारी के लिए दर्ज एफआईआर की विवेचना शुरू नहीं करायी और न ही इस पूरे मामले की सीबीआई जांच के लिए केन्द्र सरकार पर दबाब डाला। वास्तव में तो सरकार को आतंकवाद के नाम पर जेलों में बंद नौजवानों के मामलें में एक कमीशन बना देती जिसकी रिर्पोट के बाद प्रदेश की जनता यह देख लेती कि कौन आतंकवादी है और कौन निर्दोष। उन्होनें कहा कि हिन्दु-मुसलमानों में विभाजन और साम्प्रदायिक धुव्रीकरण की राजनीति प्रदेश के लिए अच्छी नहीं है।
उन्होनें कहा कि प्रदेश की सरकार ने किसानों के साथ भी धोखा देने का काम किया है। किसानों से पचास हजार तक कर्जे को माफ करने का वायदा किया गया था। जिसके सम्बंध में पता यह चला कि मात्र भूमि विकास बैंक के द्वारा ही लिए कर्जे के ब्याज की माफी के लिए सरकार जिलों से किसानों की सूची मंगवा रही है। किसानों से आज तक लागत मूल्य का पचास प्रतिशत जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने और किसान आयोग बनाने का वायदा पूरा भी नहीं किया गया। प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए सिड़ीकेटों द्वारा अवैध खनन बदस्तूर जारी है। इस स्थिति से प्रदेश को बचाने के लिए कानून के राज की स्थापना के लिए जन अधिकार अभियान को और तेज करना जरूरी है।
बैठक में आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी, प्रदेश संयोजक मो0 शोएब, सहसंयोजक नसीम खान, लाल बहादुर सिंह, संगठन प्रभारी दिनकर कपूर, गुलाब चंद गोड़, राजेश सचान, सुरेन्द्र पाल, अखिलेश दूबे, अजीत सिंह यादव, विजय राव, जोखू सिद्दकी, महेश सिंह, राज नारायण मिश्र, छक्कन चैहान, आरिफ, शाबिर, रमेश खरवार, कमलेश सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
उपवास के बाद अखिलेन्द्र ने की बैठक
सहयोगी दलों के साथ मिलकर जन अधिकार अभियान करेगें तेज
लखनऊ 20 जून 2013, प्रदेश में अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर कानून के राज की स्थापना के लिए जन अधिकार अभियान को और तेज किया जाना चाहिए। यह बातें आज दस दिवसीय उपवास के बाद कार्यालय में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक का0 अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कही। उन्होनें कहा कि सपा सुप्रीमों के निर्देशन में चल रही अखिलेश की सरकार द्वारा पहले से ही विभाजन और अलगाव के दौर से गुजर रही प्रदेश की जनता को और भी विभाजित करने की राजनीति के विरोध में यह दस दिन का उपवास रहा है। अखिलेश सरकार ने सबसे पहले पूरे समाज से दलितों को अलगाव में डाल दिया और उनकी इस कार्यवाही को दलितों में ध्रुवीकरण के लिए मायावती ने भी मदद पहुंचाने का काम किया। सभी लोग जानते है कि आरक्षण के संदर्भ में नागराज के मुकदमें में सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला था वह पिछड़ी जातियों के पिछड़ेपन के संदर्भ में था जिसकी चपेट में अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग भी आ गए, इसे मात्र सुप्रीम कोर्ट में एक पुर्नविचार याचिका दायर कर ठीक कराया जा सकता था पर मायावती ने यह काम भी नहीं किया। परशुराम जयंती पर अभियान चलाने वाली सपा सरकार ने यह जानते हुए भी अति पिछड़ी जातियों को दलितों में संवैधानिक रूप से शामिल नहीं किया जा सकता क्योकि वह अछूत नहीं है, 17 अति पिछड़ी जातियों को अनुसूचित जाति का दर्जा देने के लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पास कर केन्द्र सरकार को भेजा है। यह और कुछ नहीं अति पिछड़ी जातियों को उनके सामाजिक न्याय के अधिकार से वंचित करने की कोशिश है। उन्होनें कहा कि मुलायम सिंह समाजवादी आंदोलन की पैदावार है और राजनीति की ईमानदारी का तकाजा है कि उन्हें कर्पूरी ठाकुर फार्मूला के आधार पर अति पिछड़ों का आरक्षण कोटा अन्य पिछड़ा वर्ग से अलग कर देना चाहिए।
उन्होनें कहा कि सपा सरकार प्रदेश में हिन्दू और मुस्लिमों के बीच की खाई को और बढ़ाने की राजनीति कर रही है। यह जानते हुए भी कि आतंकवाद के मुकदमें में फंसे लोगों का मुकदमा संवैधानिक रूप से सरकार वापस नहीं ले सकती महज मुसलमानों को शिकार बनाने के लिए इस सरकार ने मुकदमा वापसी की बड़ी-बड़ी धोषणाएं की। इससे हिन्दुओं को लगा कि महज वोट के लिए यह सरकार अपराधियों पर से मुकदमा वापस लेने का काम कर रही है और इससे मुसलमानों का भी भला नहीं हुआ। यदि सरकार अपनी धोषणा के प्रति ईमानदार होती तो वह इस सम्बंध में बनी जस्टिस आर.डी. निमेष कमीशन की रिर्पोट को एक्शन टेकन रिर्पोट के साथ विधानसभा में रखने में इतना विलम्ब न करती। अभी भी इस सरकार ने खालिद के बड़े पिता की तरफ से उसकी मौत और गिरफ्तारी के लिए दर्ज एफआईआर की विवेचना शुरू नहीं करायी और न ही इस पूरे मामले की सीबीआई जांच के लिए केन्द्र सरकार पर दबाब डाला। वास्तव में तो सरकार को आतंकवाद के नाम पर जेलों में बंद नौजवानों के मामलें में एक कमीशन बना देती जिसकी रिर्पोट के बाद प्रदेश की जनता यह देख लेती कि कौन आतंकवादी है और कौन निर्दोष। उन्होनें कहा कि हिन्दु-मुसलमानों में विभाजन और साम्प्रदायिक धुव्रीकरण की राजनीति प्रदेश के लिए अच्छी नहीं है।
उन्होनें कहा कि प्रदेश की सरकार ने किसानों के साथ भी धोखा देने का काम किया है। किसानों से पचास हजार तक कर्जे को माफ करने का वायदा किया गया था। जिसके सम्बंध में पता यह चला कि मात्र भूमि विकास बैंक के द्वारा ही लिए कर्जे के ब्याज की माफी के लिए सरकार जिलों से किसानों की सूची मंगवा रही है। किसानों से आज तक लागत मूल्य का पचास प्रतिशत जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने और किसान आयोग बनाने का वायदा पूरा भी नहीं किया गया। प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए प्राकृतिक संसाधनों की लूट के लिए सिड़ीकेटों द्वारा अवैध खनन बदस्तूर जारी है। इस स्थिति से प्रदेश को बचाने के लिए कानून के राज की स्थापना के लिए जन अधिकार अभियान को और तेज करना जरूरी है।
बैठक में आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी, प्रदेश संयोजक मो0 शोएब, सहसंयोजक नसीम खान, लाल बहादुर सिंह, संगठन प्रभारी दिनकर कपूर, गुलाब चंद गोड़, राजेश सचान, सुरेन्द्र पाल, अखिलेश दूबे, अजीत सिंह यादव, विजय राव, जोखू सिद्दकी, महेश सिंह, राज नारायण मिश्र, छक्कन चैहान, आरिफ, शाबिर, रमेश खरवार, कमलेश सिंह आदि लोग उपस्थित रहे।
Wednesday, 19 June 2013
जरूरत है नीतियों को बदलने की - अखिलेन्द्र
जरूरत है नीतियों को बदलने की - अखिलेन्द्र
सपा प्रदेश में करा रही साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण-रशादी
वाम-जनवादी विकल्प की है जरूरत-कश्यप
मुलायम-माया की राजनीति से प्रदेश को बचाना होगा-डा0 गिरीश
अखिलेन्द्र ने तोड़ा उपवास, करेगें आंदोलन तेज
लखनऊ 19 जून 2013, प्रदेश में जन अधिकार अभियान के तहत कानून के राज की स्थापना के लिए विधानसभा के सामने आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने आज 1 बजे राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी, सीपीआईएम राज्य सचिव का0 एस0 पी0 कश्यप और सीपीआई राज्य सचिव का0 डा0 गिरीश के हाथों से जूस पीकर अपने दस दिवसीय उपवास को समाप्त किया। इस अवसर पर सीपीआईएम, राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल, सीपीआई, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), आइपीएफ, राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय किसान यूनियन समेत सभी वाम-जनवादी दलों के नेताओं ने संकल्प लिया कि प्रदेश में कानून की राज की स्थापना के लिए जन अधिकार अभियान और आंदोलन को तेज किया जायेगा और शीध्र ही बैठक कर आंदोलन के आगामी कार्यक्रम की धोषणा की जायेगी। आज पूरे प्रदेश से अभियान में शामिल सभी दलों के हजारों लोग विधानसभा के सामने अखिलेन्द्र के उपवास पर पहुंचे।
उपवास स्थल पर आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि कांग्रेस-भाजपा जिन अमेरीकापरस्त, कारपोरेट परस्त नीतियों पर चल रही है उसका विकल्प कोई तीसरा और चैथा मोर्चा नहीं हो सकता क्योंकि इनको बनाने वाले दल भी इन्हीं नीतियों पर अमल कर रहे है। मात्र सरकारों के बदलने से जनता की जिदंगी में बदलाव नहीं आ सकता आज जरूरत है नीतियों को बदलने की। जिन नीतियों से किसानों, मेहनतकशों और आम अवाम का भला हो सकंे। उन्होनें कहा कि यह काम मात्र वामपंथी, सोशलिस्ट और उलेमा कौसिंल जैसी जनपक्षधर आंदोलन की ताकतें ही कर सकती है जो प्रदेश में एक मंच पर आयी है।
सीपीआईएम राज्य सचिव का0 एस0 पी0 कश्यप ने कहा कि आज देश को वाम जनवादी विकल्प की जरूरत है मात्र पार्टियों का मोर्चा नहीं हमें जनपक्षधर नीतियों पर जनता का मोर्चा बनाना होगा। राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी ने कहा कि सरकार प्रदेश में साम्प्रदायिक ताकतों को मजबूत करने के लिए हिन्दु-मुस्लिम में वैमनस्य फैलाने की राजनीति कर रही है। आतंकवाद के नाम पर जेल में बंद निर्दोष मुस्लिम नौजवानों को रिहा करने की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सपा की इस सरकार ने आज तक खालिद मुजाहिद की मौत और गिरफ्तारी पर दर्ज एफआईआर की विवेचना भी शुरू नहीं करायी और सीबीआई जांच के लिए केन्द्र सरकार पर दबाब तक नहीं बनाया। सीपीआई राज्य सचिव का0 डा0 गिरीश ने कहा कि उ0 प्र0 को मुलायम-माया की राजनीति से मुक्त करा वाम-जनवादी दिशा देने की जरूरत है और जो प्रयास का0 अखिलेन्द्र द्वारा शुरू किया गया है उसमें हम पूरी ताकत से रहेगें। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रदेश अध्यक्ष गिरीश पाण्डेय ने कहा कि सपा सरकार का डा0 लोहिया की विचारधारा और समाजवाद से कोई वास्ता नहीं रह गया है। इस सरकार ने प्रदेश की जनता को अपने एक वर्ष से ज्यादा के कार्यकाल में मात्र धोखा देने का ही काम किया है। राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव व पूर्वमंत्री का0 कौशल किशोर ने कहा कि प्रदेश में कानूनव्यवस्था ध्वस्त है और गुण्ड़ा-माफिया-पुलिस राज है। प्रदेश में दलितों, अल्पसंख्यकों समेत समाज के गरीब तबकों पर लगातार हमले हो रहे है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार पाण्ड़ेय ने सपा सरकार को उसका वायदा याद दिलाते हुए किसान आयोग बनाने के सवाल को उठाया।
सभा को पूर्व सांसद इलियास आजमी, राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के महासचिव मौलाना ताहिर मदनी, मुस्लिम महिला पर्सनल ला बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर,, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के उपाध्यक्ष संदीप पाण्डेय, महामंत्री ओकांर सिंह, राष्ट्रीय बहुजन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बनारसी दास, राज्य कर्मचारी महासंध के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह, गांधी संस्थान की रजिस्ट्रार मुनीजा रफीक खान, मुस्लिम फोरम के अध्यक्ष एम के शेरवानी, पूर्व आईजी व आइपीएफ प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी, लाल देवेन्द्र सिंह चैहान, समाजसेवी सुदंरलाल सुमन, पूर्व अध्यक्ष इ0वि0वि0 लाल बहादुर सिंह, गुलाब चंद गोड़ ने सम्बोधित किया। सभा की अध्यक्षता आइपीएफ के प्रदेश संयोजक मोहम्मद शोएब एडवोकेट ने की और संचालन राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के प्रदेश अध्यक्ष परवेज आफताब ने किया।
सपा प्रदेश में करा रही साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण-रशादी
वाम-जनवादी विकल्प की है जरूरत-कश्यप
मुलायम-माया की राजनीति से प्रदेश को बचाना होगा-डा0 गिरीश
अखिलेन्द्र ने तोड़ा उपवास, करेगें आंदोलन तेज
लखनऊ 19 जून 2013, प्रदेश में जन अधिकार अभियान के तहत कानून के राज की स्थापना के लिए विधानसभा के सामने आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने आज 1 बजे राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी, सीपीआईएम राज्य सचिव का0 एस0 पी0 कश्यप और सीपीआई राज्य सचिव का0 डा0 गिरीश के हाथों से जूस पीकर अपने दस दिवसीय उपवास को समाप्त किया। इस अवसर पर सीपीआईएम, राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल, सीपीआई, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), आइपीएफ, राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय किसान यूनियन समेत सभी वाम-जनवादी दलों के नेताओं ने संकल्प लिया कि प्रदेश में कानून की राज की स्थापना के लिए जन अधिकार अभियान और आंदोलन को तेज किया जायेगा और शीध्र ही बैठक कर आंदोलन के आगामी कार्यक्रम की धोषणा की जायेगी। आज पूरे प्रदेश से अभियान में शामिल सभी दलों के हजारों लोग विधानसभा के सामने अखिलेन्द्र के उपवास पर पहुंचे।
उपवास स्थल पर आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि कांग्रेस-भाजपा जिन अमेरीकापरस्त, कारपोरेट परस्त नीतियों पर चल रही है उसका विकल्प कोई तीसरा और चैथा मोर्चा नहीं हो सकता क्योंकि इनको बनाने वाले दल भी इन्हीं नीतियों पर अमल कर रहे है। मात्र सरकारों के बदलने से जनता की जिदंगी में बदलाव नहीं आ सकता आज जरूरत है नीतियों को बदलने की। जिन नीतियों से किसानों, मेहनतकशों और आम अवाम का भला हो सकंे। उन्होनें कहा कि यह काम मात्र वामपंथी, सोशलिस्ट और उलेमा कौसिंल जैसी जनपक्षधर आंदोलन की ताकतें ही कर सकती है जो प्रदेश में एक मंच पर आयी है।
सीपीआईएम राज्य सचिव का0 एस0 पी0 कश्यप ने कहा कि आज देश को वाम जनवादी विकल्प की जरूरत है मात्र पार्टियों का मोर्चा नहीं हमें जनपक्षधर नीतियों पर जनता का मोर्चा बनाना होगा। राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी ने कहा कि सरकार प्रदेश में साम्प्रदायिक ताकतों को मजबूत करने के लिए हिन्दु-मुस्लिम में वैमनस्य फैलाने की राजनीति कर रही है। आतंकवाद के नाम पर जेल में बंद निर्दोष मुस्लिम नौजवानों को रिहा करने की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली सपा की इस सरकार ने आज तक खालिद मुजाहिद की मौत और गिरफ्तारी पर दर्ज एफआईआर की विवेचना भी शुरू नहीं करायी और सीबीआई जांच के लिए केन्द्र सरकार पर दबाब तक नहीं बनाया। सीपीआई राज्य सचिव का0 डा0 गिरीश ने कहा कि उ0 प्र0 को मुलायम-माया की राजनीति से मुक्त करा वाम-जनवादी दिशा देने की जरूरत है और जो प्रयास का0 अखिलेन्द्र द्वारा शुरू किया गया है उसमें हम पूरी ताकत से रहेगें। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के प्रदेश अध्यक्ष गिरीश पाण्डेय ने कहा कि सपा सरकार का डा0 लोहिया की विचारधारा और समाजवाद से कोई वास्ता नहीं रह गया है। इस सरकार ने प्रदेश की जनता को अपने एक वर्ष से ज्यादा के कार्यकाल में मात्र धोखा देने का ही काम किया है। राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव व पूर्वमंत्री का0 कौशल किशोर ने कहा कि प्रदेश में कानूनव्यवस्था ध्वस्त है और गुण्ड़ा-माफिया-पुलिस राज है। प्रदेश में दलितों, अल्पसंख्यकों समेत समाज के गरीब तबकों पर लगातार हमले हो रहे है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार पाण्ड़ेय ने सपा सरकार को उसका वायदा याद दिलाते हुए किसान आयोग बनाने के सवाल को उठाया।
सभा को पूर्व सांसद इलियास आजमी, राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के महासचिव मौलाना ताहिर मदनी, मुस्लिम महिला पर्सनल ला बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर,, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के उपाध्यक्ष संदीप पाण्डेय, महामंत्री ओकांर सिंह, राष्ट्रीय बहुजन समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष बनारसी दास, राज्य कर्मचारी महासंध के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह, गांधी संस्थान की रजिस्ट्रार मुनीजा रफीक खान, मुस्लिम फोरम के अध्यक्ष एम के शेरवानी, पूर्व आईजी व आइपीएफ प्रवक्ता एस. आर. दारापुरी, लाल देवेन्द्र सिंह चैहान, समाजसेवी सुदंरलाल सुमन, पूर्व अध्यक्ष इ0वि0वि0 लाल बहादुर सिंह, गुलाब चंद गोड़ ने सम्बोधित किया। सभा की अध्यक्षता आइपीएफ के प्रदेश संयोजक मोहम्मद शोएब एडवोकेट ने की और संचालन राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के प्रदेश अध्यक्ष परवेज आफताब ने किया।
Tuesday, 18 June 2013
अपनी घोषणाओं को अमल में लाए सरकार - अखिलेन्द्र :कल जुटेंगें वामपंथी-जनवादी दलों के नेता
अपनी घोषणाओं को अमल में लाए सरकार - अखिलेन्द्र
कल जुटेंगें वामपंथी-जनवादी दलों के नेता
आइपीएफ संयोजक के उपवास का नौवां दिन, कल होगा समापन
लखनऊ 18 जून 2013, प्रदेश में जन अधिकार अभियान के तहत कानून के राज की स्थापना के लिए विधानसभा के सामने आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह का दस दिवसीय उपवास आज नौवें दिन में प्रवेश कर गया कल इस उपवास का समापन होगा। इस अवसर पर सीपीआईएम राज्य सचिव, सीपीआई राज्य सचिव, राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), भारतीय किसान यूनियन समेत वाम-जनवादी संगठनों व नागरिक आंदोलनों के नेतागण शिरकत करेंगें।
आज नौवें दिन सोनभद्र व चंदौली से सैकड़ों की संख्या में आदिवासी और ठेका मजदूर उपवास स्थल पर पहुंचे इस अवसर पर आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करतें हुए आम नागरिकों के जीवन, पर्यावरण और पेयजल के लिए गहरा संकट पैदा करने वाले अवैध खनन पर मात्र मायावती सरकार को गुनाहगार बताकर अखिलेश सरकार अपनी जबाबदेही से बच नहीं सकती है। वास्तव में इस सरकार के संरक्षण में चिकांरा जैसे सिडीकेटों द्वारा अवैध खनन बदस्तूर जारी है और जो अधिकारी इस अवैध खनन के खिलाफ कानूनसम्मत काम करने की कोशिश भी करते हैं तो उन्हें पदों से हटा दिया जाता है, उन पर लगातार हमले हो रहे। इसलिए सरकार को सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करना चाहिए और अपनी धोषणाओं पर अमल करते हुए अवैध खनन पर रोक लगानी चाहिए। उन्होनें सवाल उठाया कि आतंकवाद के नाम पर मुस्लिम नौजवानों को रिहा करने की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली यह सरकार आज तक खालिद मुजाहिद की मौत और गिरफ्तारी पर दर्ज एफआईआर की विवेचना भी क्यों शुरू नहीं करा पायी। उन्होनें कहा कि सरकार को प्रदेश में साम्प्रदायिक ताकतों को मजबूत करने के लिए हिन्दु-मुस्लिम में वैमनस्य फैलाने की राजनीति से बाज आना चाहिए। उन्होनें कहा कि मात्र तीन तिकडम से कोई तीसरा मोर्चा नहीं बन सकता। प्रदेश के जो सवाल हम अपने उपवास के माध्यम से उठा रहे है वह समाजवादी पार्टी द्वारा किए गए वायदों के दायरे में ही है। उन्होनें सरकार से प्रदेश में किसान आयोग का गठन करने, किसानों के बकाएं का भुगतान करने, किसानों व बुनकरों के कर्ज माफ करने, लागत का पचास प्रतिशत जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने, तत्काल बिजली की बढ़ी दरें वापस लेने, मनरेगा में सौ दिन काम और 15 दिन में मजदूरी के भुगतान की गारंटी, वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों और परम्परागत वनाश्रित जातियों को पुश्तैनी जमीन पर मालिकाना अधिकार देने, उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार बिजली विभाग में काम करने वाले संविदा मजदूरों को नियमिति करने, अति पिछड़े हिन्दू व पिछड़े मुसलमानों को अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में अलग कोटा देने जैसे प्रदेश के ज्वंलत सवालों को जनहित में तत्काल हल करने के लिए कहा।
अखिलेन्द्र का मेडिकल बुलेटिन जारी करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आई.जी. एस. आर. दारापुरी ने बताया कि उनका स्वास्थ्य बेहद खराब हो रहा है। उनका वजन काफी कम हो गया है और उनके पेशाब में कीटोन और प्रोटीन का आना जारी है। उनका ब्लड़ प्रेशर और प्लस रेट भी सामान्य से ज्यादा है।
आज राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के प्रदेश अध्यक्ष परवेज आफताब, सचिव लाल देवेन्द्र सिंह चैहान, राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव व पूर्वमंत्री का0 कौशल किशोर, सीआईटीयू के प्रदेश महासचिव का0 प्रेमनाथ राय, सीपीएम के जिला सचिव का0 छोटेलाल पाल, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के महामंत्री ओकांर सिंह, जोखू सिद्दकी, अजय राय, शम्भूनाथ कौशिक, राजेश सचान ने अखिलेन्द्र के उपवासस्थल पर आयोजित सभा को सम्बोधित किया। सभा का संचालन आइपीएफ के प्रदेश प्रवक्ता गुलाब चंद गोड़ ने किया।
कल जुटेंगें वामपंथी-जनवादी दलों के नेता
आइपीएफ संयोजक के उपवास का नौवां दिन, कल होगा समापन
लखनऊ 18 जून 2013, प्रदेश में जन अधिकार अभियान के तहत कानून के राज की स्थापना के लिए विधानसभा के सामने आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह का दस दिवसीय उपवास आज नौवें दिन में प्रवेश कर गया कल इस उपवास का समापन होगा। इस अवसर पर सीपीआईएम राज्य सचिव, सीपीआई राज्य सचिव, राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया), भारतीय किसान यूनियन समेत वाम-जनवादी संगठनों व नागरिक आंदोलनों के नेतागण शिरकत करेंगें।
आज नौवें दिन सोनभद्र व चंदौली से सैकड़ों की संख्या में आदिवासी और ठेका मजदूर उपवास स्थल पर पहुंचे इस अवसर पर आयोजित सभा को सम्बोधित करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करतें हुए आम नागरिकों के जीवन, पर्यावरण और पेयजल के लिए गहरा संकट पैदा करने वाले अवैध खनन पर मात्र मायावती सरकार को गुनाहगार बताकर अखिलेश सरकार अपनी जबाबदेही से बच नहीं सकती है। वास्तव में इस सरकार के संरक्षण में चिकांरा जैसे सिडीकेटों द्वारा अवैध खनन बदस्तूर जारी है और जो अधिकारी इस अवैध खनन के खिलाफ कानूनसम्मत काम करने की कोशिश भी करते हैं तो उन्हें पदों से हटा दिया जाता है, उन पर लगातार हमले हो रहे। इसलिए सरकार को सर्वोच्च न्यायालय का सम्मान करना चाहिए और अपनी धोषणाओं पर अमल करते हुए अवैध खनन पर रोक लगानी चाहिए। उन्होनें सवाल उठाया कि आतंकवाद के नाम पर मुस्लिम नौजवानों को रिहा करने की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली यह सरकार आज तक खालिद मुजाहिद की मौत और गिरफ्तारी पर दर्ज एफआईआर की विवेचना भी क्यों शुरू नहीं करा पायी। उन्होनें कहा कि सरकार को प्रदेश में साम्प्रदायिक ताकतों को मजबूत करने के लिए हिन्दु-मुस्लिम में वैमनस्य फैलाने की राजनीति से बाज आना चाहिए। उन्होनें कहा कि मात्र तीन तिकडम से कोई तीसरा मोर्चा नहीं बन सकता। प्रदेश के जो सवाल हम अपने उपवास के माध्यम से उठा रहे है वह समाजवादी पार्टी द्वारा किए गए वायदों के दायरे में ही है। उन्होनें सरकार से प्रदेश में किसान आयोग का गठन करने, किसानों के बकाएं का भुगतान करने, किसानों व बुनकरों के कर्ज माफ करने, लागत का पचास प्रतिशत जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने, तत्काल बिजली की बढ़ी दरें वापस लेने, मनरेगा में सौ दिन काम और 15 दिन में मजदूरी के भुगतान की गारंटी, वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों और परम्परागत वनाश्रित जातियों को पुश्तैनी जमीन पर मालिकाना अधिकार देने, उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार बिजली विभाग में काम करने वाले संविदा मजदूरों को नियमिति करने, अति पिछड़े हिन्दू व पिछड़े मुसलमानों को अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में अलग कोटा देने जैसे प्रदेश के ज्वंलत सवालों को जनहित में तत्काल हल करने के लिए कहा।
अखिलेन्द्र का मेडिकल बुलेटिन जारी करते हुए आइपीएफ के राष्ट्रीय प्रवक्ता व पूर्व आई.जी. एस. आर. दारापुरी ने बताया कि उनका स्वास्थ्य बेहद खराब हो रहा है। उनका वजन काफी कम हो गया है और उनके पेशाब में कीटोन और प्रोटीन का आना जारी है। उनका ब्लड़ प्रेशर और प्लस रेट भी सामान्य से ज्यादा है।
आज राष्ट्रीय ओलेमा कौंसिल के प्रदेश अध्यक्ष परवेज आफताब, सचिव लाल देवेन्द्र सिंह चैहान, राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव व पूर्वमंत्री का0 कौशल किशोर, सीआईटीयू के प्रदेश महासचिव का0 प्रेमनाथ राय, सीपीएम के जिला सचिव का0 छोटेलाल पाल, सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के महामंत्री ओकांर सिंह, जोखू सिद्दकी, अजय राय, शम्भूनाथ कौशिक, राजेश सचान ने अखिलेन्द्र के उपवासस्थल पर आयोजित सभा को सम्बोधित किया। सभा का संचालन आइपीएफ के प्रदेश प्रवक्ता गुलाब चंद गोड़ ने किया।
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